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एम4पीन्यूज़।

सर्दी हर किसी को ठिठुरने पर मजबूर कर देती है। चाहे वो अमीर हो या गरीब। फर्क सिर्फ इतना होता है कि सर्दी की रातों में किसी के पास ठंड से बचने के लिए हर सुविधा मौजूद होती है तो किसी के पास सिर छुपाने के लिए छत भी नहीं होती। सर्दी को तरस नहीं आता उसे गरीब अमीर की समझ नहीं।

 

ठंड में कोसा किनारा ढूंढते 'नन्हे हाथ'
ठंड में कोसा किनारा ढूंढते ‘नन्हे हाथ’

सर्दी में सबसे ज्यादा दिक्कत सड़क के किनारे जिंदगी बिताने वालों को है। उनके पास इस ठंड से बचने का कोई उपाय नहीं है। सड़क किनारे रहने वाले मासूम भी बाकि बच्चो के तन पर कपड़े देख आह भर कर रह जाते हैं। कि काश वो भी इस बेरहम सर्दी से बच पाते।

ठंड में कोसा किनारा ढूंढते 'नन्हे हाथ'
ठंड में कोसा किनारा ढूंढते ‘नन्हे हाथ’

शाम ढलते ही भीड़ से पटे रहने वाले बाजार और सड़कें पूरी तरह वीरान हो जा रही हैं। शाम पांच बजते-बजते ठंड से बचने के लिए लोग घरों में दुबक जा रहे हैं। यहां तक कि लोग जरूरी काम पड़ने पर भी घर से निकलने में कतराते रहे हैं। सड़क किनारे बसे लोगों के पास भी ठण्ड से बचने के लिए कोई उपाय नहीं है। ठण्ड की मार झेल रहे लोग अलाव के लिए भी तरस रहे हैं। ये ठंड उन लोगों पर आफत बन के टूट रही है।

ठंड में कोसा किनारा ढूंढते 'नन्हे हाथ'
ठंड में कोसा किनारा ढूंढते ‘नन्हे हाथ’

वाहनों की धीमी हुई रफ्तार
कड़ाके की ठंड व शीतलहर के प्रकोप के बाद मुख्य सड़कों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार धीमी हुई है। ठंड पड़ रही है, इस हालत में कोई भी काम करने के लिए घर से बाहर निकलना नहीं चाहता है। लेकिन मजबूरी के कारण लोगों को काम पर किसी तरह निकलना पड़ता है।


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