Share it

एम4पीन्यूज|चंडीगढ़ 

पंजाब के 4 विधानसभा क्षेत्रों में हुआ उपचुनाव मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की सियासी शिकस्त का गवाह बनकर उभरा है। इस उप चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद भी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अपने राजनीतिक सलाहकार व दाखा से कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन संदीप संधू को जीत का स्वाद नहीं चखा सके। वहीं, दूसरी तरफ शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की ‘पक्की रजिस्टर्ड’ सीट जलालाबाद रेत की मानिद उनके हाथ से फिसल गई और कांग्रेस की तरफ से पहली बार चुनावी अखाड़े में उतरे रमिंदर सिंह आंवला ने शिअद प्रत्याशी डॉक्टर राज सिंह डिब्बीपुरा को 16633 वोटों के बड़े अंतर के साथ हराया दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो इन दोनों सीटों ने पंजाब की राजनीति के भविष्य का पन्ना पलट दिया है। जनता जर्नादन ने बड़े ही साफ शब्दों में संकेत दे दिए हैं कि राजनीति किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं टिकी है। जनता उसे ही वोट करती है, जो उनकी बात सुनता है। ऐसे में 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा के चुनावी परिप्रेक्ष्य में न केवल मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को बल्कि शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को भी नए सिरे से इस बात पर मंथन करना होगा कि जनता के सरोकारों से जुड़ा जाए, उनकी बात सुनी जाए।

खुद शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल भी इस उप चुनाव के जरिए 2022 की तस्वीर गढऩे में जुट गए हैं। उन्होंने तो ऐलान भी कर दिया है कि दाखा में मिली हार कांग्रेस की 2022 में होने वाली हार का संकेत है। बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा कांग्रेस पार्टी द्वारा सरकारी मशीनरी, पैसे तथा बाहुबल का अनंत दुरूपयोग भी दाखा के लोगों को डरा नही सका तथा उन्होने इस क्षेत्र से अकाली-भाजपा उम्मीदवार सरदार मनप्रीत सिंह अयाली को शानदार ढंग से जिता कर कांग्रेस को करारा सबक सिखाया है।

यह बाकी तीन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा करीबी मुकाबला था। उन्होने कहा कि आज के बाद कांग्रेसी कई सालों के लिए गुमनामी में जाने की तैयारी शुरू कर देंगे, क्योंकि दो साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी क्षेत्रों में उनका यही हश्र होगा।अकाली दल अध्यक्ष ने सत्ताधारी पार्टी द्वारा लोगों को डराने,धमकाने, प्रलोभन देने तथा सरकारी ताकत के दुरूपयोग के बावजूद अकाली-भाजपा उम्मीदवार के साथ डटकर खड़े रहने के लिए दाखा क्षेत्र के लोगों का तहेदिल से धन्यवाद किया।

उन्होने अकाली-भाजपा के कार्यकर्ताओं तथा नेताओं का लेागों की सेवा में कोई कसर न छोडऩे के लिए धन्यवाद किया।सुखबीर बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दाखा चुनाव को अपनी व्यक्तिगत तथा राजनीतिक प्रतिष्ठा का मसला बनाया हुआ था। यह उस द्वारा अपने चहेते को उम्मीदवार बनाने तथा चुनाव प्रचार के लिए निकाले रोड शो से स्पष्ट हो गया था। इसके बावजूद दाखा के लोगों ने मुख्यमंत्री को धूल चटा दी है।

उपचुनाव के नतीजे आने के बाद यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए बादल ने कहा कि पंजाब के राजनीतिक इतिहास में सत्ताधारी शायद ही उपचुनाव हारती है। यदि ऐसी हार होती है तो उसके बाद अगले विधानसभा चुनाव में इसका पूरी तरह सफाया हो जाता है। उन्होने कहा कि यही गिद्दड़बाहा चुनाव के समय भी हुआ था तथा आदमपुर उपचुनाव के बाद भी हुआ था, जो कि हम हार गए थे।

इसीलिए हर कोई जानता है कि दाखा उपचुनाव का नतीजा इतना महत्वपूर्ण क्यों है, क्योंकि राज्य के इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार हुआ है कि जब कांग्रेस पार्टी एक उपचुनाव हारी है। इससे पहले गिद्दड़बाहा से हारी थी, जब बेअंत सिंह मुख्यमंत्री थे।अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के बारे टिप्पणी करते हुए बादल ने कहा कि जलालाबाद में अकाली-भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ अमरिंदर तथा उसकी सारी पार्टी ने सरकारी मशीनरी तथा पैसे समेत अपने सभी संसाधन लगा दिए थे।

उन्होने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जलालाबाद में स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव का माहौल खराब करने के लिए बाहरी राज्यों से बदमाश बुलाए थे। यह सब एक ऐसे अकाली-भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए किया गया, जोकि अपनी ईमानदारी तथा नेकी के लिए जाना जाता है। कांग्रेस द्वारा जलालाबाद में अपने औसत से कही ज्यादा ताकत, पैसे तथा माफिया का दुरूपयोग किया गया था। बादल ने कहा कि बेशक सत्ताधारी पार्टी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग तथा अन्य हथकंडों द्वारा फगवाड़ा तथा मुकेरिया के चुुनाव नतीजे प्रभावित करने में कामयाब हो गई है, परंतु मामूली अंतर से हासिल की यह जीत स्पष्ट करती हैं कि जब विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस के जीतने की कोई संभावना नही होगी। उन्होने कहा कि फगवाड़ा तथा मुकेरिया के नतीजे कस्बों तथा शहरों में अकाली-भाजपा के हुए पुनरूत्थान की ओर इशारा करते हैं।


Share it

By news

Truth says it all

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *