हीरे जितना कीमती होता है चीड़ वृक्ष से निकला द्रव्य


हीरे जितना कीमती होता है चीड़ वृक्ष से निकला द्रव्य
हीरे जितना कीमती होता है चीड़ वृक्ष से निकला द्रव्य

1000 साल पुराने गिरगिट के मिले थे अवशेष

एम4पीन्यूज, ंचंडीगढ़
जी हां, चीड़ वृक्ष के घायल होने पर उससे निकलने वाला द्रव्य हीरे जितना कीमती हो सकता है। बशर्ते यह द्रव्य प्राकृतिक पड़ाव पार कर ले। दरअसल, चीड़ जैसे कई वृक्षों से निकलने वाले इस द्रव्य को रेजिन कहा जाता है, जो समय के साथ सख्त होकर पत्थर बनने की क्षमता रखता है। इसे जीवाश्म रेजिन या कहरुवा के नाम से भी जाना जाता है, जिसे बहुमूल्य पत्थर के तौर पर बेचा जाता है। प्राचीनकाल में इनका प्रयोग आभूषणों में किया जाता रहा है। म्यांमार की कहरुवे की खासी बहुतायत है, यहां इनकी माइन्स भी हैं। यह पदार्थ पीले रंग का होता है, जो औषधि बनाने में भी प्रयोग होता है। चीन में भी कई बहुमूल्य वस्तुओं में इस पदार्थ का इस्तेमाल होता है।
990 लाख साल पुराने पक्षी के अवशेष मिले थे रेजिन में
जून 2016 के दौरान बर्मा में कहरुवे की माइन में खुदाई करते हुए शोधकर्ताओं को कहरुवे में जमे हुए छोटे पक्षी के पंख मिले थे। यह अब तक शोध में सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पंख 990 लाख साल पुराने हो सकते हैं। इतने वर्षों के बाद भी यह पंख इतने सुरक्षित हैं कि कहरुवे में इसके बाल, हड्डी तक दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि पंख का रंग भी जस का तस कायम है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह डायनासोर युग का पक्षी हो सकता है।
1000 साल पुराने गिरगिट के मिले थे अवशेष
मार्च 2016 में शोधकर्ताओं ने खुलासा किया था कि म्यांमार से मिले कहरुवे में गिरगिट के अवशेष मिले हैं, जो कहरुवे के 12 विभिन्न हिस्सों में बंटे हुए हैं। यह अवशेष 1000 साल पुराने हो सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक संभवत: गिरगिट वृक्ष से निकलने वाले चिपचिपे द्रव्य में फंस गया होगा और बचने के दौरान छटपटाहट में उसकी मौत हो गई होगी। इसके बाद कहरुवे टुकड़ों में बंटा तो गिरगिट का शरीर भी 12 हिस्सों में बंट गया होगा।
आज भी चीड़ से निकलने वाले द्रव्य में फंस जाती है मकडिय़ां व अन्य छोटे जीव
हिमाचल में चीड़ के वृक्षों से निकल रहे द्रव्य में आज भी मकडिय़ों व अन्य छोटे जीवों को फंसे हुए देखा जा रहा सकता है। यह द्रव्य बेहद सुगंधित होता है, जिसकी वजह से छोटे-मोटे कीट-पतंगे इसकी तरफ आकर्षित होते हैं और द्रव्य में फंस जाते हैं। अगर यह द्रव्य समय की लंबी अवधि पार कर ले तो संभवत: यह पत्थर की शक्ल ले लेगा और इसमें फंसे जीव जीवाश्म बन जाएंगे।
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