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एम4पीन्यूज|दिल्ली 

इस साल गर्मी सबके हाल बेहाल करने वाली है। अभी अप्रैल की शुरुआत भी नहीं हुई कि सूरज ने पसीना निकालना शुरू कर दिया है। दिन के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल होने लगा है। ऐसे में मौसम की जानकारी देने वाली निजी क्षेत्र की कंपनी स्काईमेट ने मॉनसून पर पहला अनुमान जारी कर दिया है। स्काईमेट के मुताबिक इस साल सामान्य से कम बारिश होगी। जुलाई के बाद से अल-नीनो का असर मॉनसून पर हावी हो जाएगा और ऐसे में इस साल सामान्य मॉनसून की मुश्किल से 50 फीसदी की उम्मीद है। अगस्त और सितंबर में मॉनसून कमजोर पड़ सकता है।

स्काईमेट के मुताबिक इस साल जून से सितंबर के दौरान सामान्य के मुकाबले 95 फीसदी मॉनसून रहने का अनुमान है। जून में सामान्य के मुकाबले 102 फीसदी, जुलाई में 94 फीसदी और अगस्त में 93 फीसदी मॉनसून रहने का अनुमान है। सितंबर में सामान्य के मुकाबले 96 फीसदी मॉनसून रहने का अनुमान है।

किस तरह का प्रिडिक्शन
– ज्यादा बारिश के चान्स 0% (ज्यादा बारिश से मतलब 110% या उससे ज्यादा)
– नाॅर्मल से ज्यादा बारिश के चान्स 10% (यानी 105 से 110%)
– 50% चान्स नॉर्मल बारिश के (यानी 96 से 104%)
– 25% चान्स नॉर्मल से कम बारिश के (90 से 95%)
– 15% चान्स सूखे के (यानी 90% से कम)

हर महीने देशभर में कितनी बारिश की उम्मीद
– 164 mm जून में
– 289 mm जुलाई में
– 261 mm अगस्त में
– 173 mm सितंबर में
– जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश नॉर्मल से 30% तक हो सकती है।

अल नीनो का कितना असर?
– अल नीनो इफेक्ट इस साल के मानसून सीजन पर देखा जा सकता है। और ये भारत के लिहाज से चिंता की बात है। हालांकि, एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ अल नीनो इफेक्ट बारिश और फसलों पर असर नहीं डाल सकता।
– ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ मीटिरियोलॉजी के मुताबिक, 2017 में अल नीनो इफेक्ट के बढ़ने की संभावना है।

पिछले तीन साल में कितनी बारिश
– 2014 में नॉर्मल से 12% कम बारिश हुई। देश के कई हिस्सों को सूखे का सामना करना पड़ा। इस दौरान माॅनसून पिछले पांच सालों में सबसे कमजोर रहा।
– 2015 में भी मॉनसून कमजोर रहा और सिर्फ 86% बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार दूसरे साल सूखा पड़ा।
– 2016 में अल नीनो को ला नीना ने रिप्लेस किया। 97% यानी करीब नॉर्मल बारिश हुई। हालांकि, देश के खेती वाले हिस्सों में बहुत ज्यादा बारिश नहीं हुई और इसका नुकसान देखने मिल सकता है।


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