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-बेहद सीक्रेट तरीके से बुलाई गई थी बैठक, पंजाब विधानसभा से मंजूरी तक नहीं ली गई

एम4पीन्यूज, चंडीगढ़
राजस्थान को 8 एम.ए.एफ. पानी की सप्लाई का निर्णय महज तीन हफ्तों में लिया गया था। आनन-फानन में यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि वल्र्र्ड बैंक की एक टीमजनवरी 1955 में भारत व पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे पर लेकर दौरा करने वाली थी। भारत के चीफ नैगोशिएटर एन.डी.गुलाटी ने लिखा है कि उन्होंने वाशिंगटन से भारत सरकार को पत्र भेजा कि भारत सरकार जल्द से जल्द इंटर स्टेट एग्रीमेंट का दस्तावेज तैयार करे, जिसमें पूर्वी नदियों के पानी की पूरी उपयोगिता व उसके बंटवारे का जिक्र किया गया हो ताकि पाकिस्तान को वल्र्र्ड बैंक के सामने कोई मुद्दा उठाने का मौका न मिले। तब पूर्व सिंचाई मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने इसकी कमान संभाली और 29 जनवरी 1955 को एक बैठक कर निर्णय लिया गया, जिसमें रावी-ब्यास नदी के प्री-पार्टिशन यूज के तहत 15.85 एम.ए.एफ. पानी को संबंधित राज्यों के बीच बांटा गया।
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यह हुआ बंटवारा
  • पंजाब-5.90 एम.ए.एफ
  • राजस्थान-8.00 एम.ए.एफ
  • पेप्सू-1.30 एम.ए.एफ
  • जम्मू-कश्मीर-0.65 एम.ए.एफ
सीक्रेट रखा गया सबकुछ
पानी बंटवारे पर यह बैठक बेहद गुप्त तरीके हुई। यहां तक कि राज्यों को बैठक में लिए गए निर्णय का जो दस्तावेज भेजा गया, उसपर भी सीक्रेट लिखा हुआ था। जल मामलों के विशेषज्ञ इस सीक्रेट डाक्यूमेंट को केंद्र सरकार की चालाकी मानते हैं। उनके मुताबिक यह सीक्रेट दस्तावेज वल्र्र्ड बैंक या पाकिस्तान से छुपाने के लिए नहीं था बल्कि इसलिए सीक्रेट रखा गया ताकि नॉन रिपेरियन स्टेट राजस्थान को 8.00 एम.ए.एफ. पानी की घोषणा से पंजाबियों में क्रोध की चिंगारी न भड़क उठे। और तो और इस निर्णय को पंजाब विधानसभा या मुख्मयंत्री से मंजूर करवाने की जरूरत तक नहीं समझी गई। बाद में केंद्रीय सिंचाई मंत्री ने बैठक के मिनट्स को कन्फर्म करवाने के राज्य सरकार को कई पत्र भेजे। हालांकि बाद में काफी समय बाद संकोच मुद्रा में पंजाब के सिंचाई मंत्री लाहिरी सिंह ने एक लाइन का जवाब भेजा मिनट्स ऑफ द कॉन्फ्रेस हेल्ड ऑन 29 जनवरी 1955 आर कन्फम्र्ड।
पंजाब को 5.90 एम.ए.एफ ही क्यों
पंजाब को महज 5.90 एम.ए.एफ. पानी इसलिए दिया गया क्योंकि 29 जनवरी 1955 की बैठक में राज्यों को निर्देश दिए गए थे कि वह लिफ्ट इरीगेशन यानी ट्यिूबवैल या अन्य तरीके से होने वाली सिंचाई वाले हिस्से में पानी की जरूरत का ब्यौरा न दें। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि अगर पंजाब या पेप्सू ने अपने पूरे सिंचाई वाले हिस्से संबंधी पानी की जरूरत पेश कर दी तो राजस्थान को पानी की सप्लाई मुमकिन नहीं हो पाएगी।

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