खुलासाः वाशिंगटन के इशारों पर हुई भारत में नोटबंदी


बड़ी बड़ी अमेरिकन कंपनियों को लुभाने के लिए किया गया ये कांम

एम4पीन्यूज

भारत में नोटबंदी अमेरिका के साथ हुई नीति हस्ताक्षर का नतीजा है जिसमें भारत को कैशलैस करने का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका की बड़ी कंपनियों को सीधे फायदा पहुंचाना है। एेसा हमारा नहीं बलि्क yournewswire.com के एडिटर इन चीफ का मानना है उन्होंने अपनी इस खबर में एेसे कईं तथ्य देने की कोशिश भी की है जिसके बाद खुलासे का अाधारों को मिटा दिया गया है, का भी जिक्र किया गया है। गौरतलब है कि अमेरिका की डवलपमेंटल एजेंसी यूएसएड ने भारत के साथ एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की, ये पार्टनरशिप चीन के साथ भी की जाने वाली है जिसमें तहत एक नैगोशियेबल कारपोरेशन अग्रीमेंट साइन हुआ, जिसका खास हिस्सा था कि भारत में कैश इकोनॉमी से कैशलेस इकोनॉमी बना दिया जाए। बराक ओबामा द्वारा की गई इस डील को प्रधानमंत्री मोदी और मिनिस्ट्री अॉफ फाइनेंस के साथ मिलकर किया गया।
बता दें कि यूएसएड व कैटालिस्ट के साथ एक नीति तहत सांझेदारी हुई जिसमें भारत में डिजिटाइल पेमेंट को लेकर यूएसएड की अॉफिशियल प्रेस स्टेटमेंट भी दी गई। बताते चलें कि कैटालिस्ट के संचालक अालोक गुप्ता जो कि कैटालिस्ट की तरफ से प्रोजेक्ट इक्यूबेशन को रीप्रेजेंट कर रहे हैं यूएसएड के मुख्य स्पांसर भी हैं। उनके साथ हुई सांझेदारी में भारत में नोटबंदी से लेकर धीरे धीरे कैश को बैंकों में फ्लो कम करने की नीति का भी जिक्र भी प्रेस रीलिस में किया गया जो कि 14 अक्टूबर को ही बाहर आ गया था और बाद में इसमें से भारत शब्द को हटा दिया गया। अालोक गुप्ता अाधार कार्ड भारत में उतारने वाली कंपनी और बिग बर्दर बायोमैटि्रक कंपनी के भी एक मुख्य मेंबर हैं।

इस खबर में ये भी बताया गया है कि भारत के साथ हुई अमेरिका की डील में भारत के बैंकों में नोटबंदी के बाद कैश का कम फ्लो होना एक नीति का हिस्सा है ताकि विदेशी कंपनियां जैसे कि वीजा, मास्टरकार्ड, डेल इत्यादि कंपनियों को बड़े स्तर पर फायदा पहुंचाया जा सके।

http://yournewswire.com/washington-cash-ban-india/

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