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एम4पीन्यूज।

मांसाहार में चिकन के शौकीनों के लिए यह एक बुरी खबर हो सकती है कि जिस लजीज स्वाद के लिए वे मुर्गे को अपने पेट में डाल रहे हैं, वही उनके लिए एक बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने जो सर्वेक्षण किया है, उसमें सनसनीखेज परिणाम सामने आए हैं। इन परिणामों को देखते हुए हो सकता है कि आप मुर्गे खाना कम कर दें या फिर बंद कर दें क्योंकि जिस मुर्गे को खाकर आप फूले नहीं समा रहे हैं, भविष्य में यही मुर्गा आपकी सेहत के साथ नुकसान कर सकता है, वह भी उस वक्त जब आप बीमार पड़ जाएं…

सीएसई के सर्वेक्षण में जो सनसनीखेज बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक पोल्ट्री फॉर्म में मुर्गों का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा रही हैं। एंटीबायोटिक दवाइयों से मुर्गे जरूर सेहतमंद हो रहे हैं लेकिन जब उन्हें मारकर चिकन के रूप में परोसा जाता है, तब ये एंटीबायोटिक दवाइयां मरे हुए मांस में रह जाती हैं और यही एंटीबायोटिक दवाइयां खाने वाले के पेट में पहुंच जाती हैं।

बाद में इसका असर यह होता है कि इंसानी शरीर एंटीबायोटिक दवाइयों का पहले से आदी होने के कारण बाहर से ली जा रही दवा असर ही नहीं करती। सबसे हैरत की बात तो यह है कि मुर्गों का वजन बढ़ाने वाले पोल्ट्री फार्म जो एंटीबायोटिक दवाइयां खिला रहे हैं, वह इंसानों को नहीं दी जाती। भारत में यह भी देखा गया है कि एंटीबायोटिक दवाइयां खुलेआम बिकती हैं जिस पर कोई रोकटोक नहीं है।

मिक्सचर में परोस दी जाती है ग्रोथ एंटीबायोटिक
रिपोर्ट के अनुसार ये ऐसे एंटीबायोटिक हैं, जो लोगों के पेट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को सिर्फ खत्म करने के साथ-साथ बीमारी को ठीक करने वाली दवाओं को भी बेअसर कर देते है। यह भी बताया गया है कि पोल्ट्री फार्म के केयर टेकर्स मुर्गों को खाने के लिए खास किस्म का मिक्सचर देते है, जिसके साथ ही ग्रोथ एंटीबायोटिक दवाएं डाल दी जाती हैं। कोलिस्टिन ऐसी दवा है, जिसके इस्तेमाल के बाद दूसरी कोई एंटीबायोटिक दवा शरीर पर असर ही नहीं करती।

मुर्गों में मिला साल्मोनेला इंफेक्शन
मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की एक्सपर्ट ने बताया कि पोल्ट्री में रखे मुर्गों में से 30 प्रतिशत की इंटेस्टाइन में साल्मोनेला इंफेक्शन मिला है। छोटी सी जगह जिसमें बड़ी मुश्किल 4 मुर्गे रखे जाने चाहिए, वहां एकसाथ 12 मुर्गों को रखा गया है। इस कारण मुर्गों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इंफेक्शन होने के बाद मुर्गों के बैक्टीरिया एक-दूसरे के जीन्स को भी बदल लेते हैं और उसके बाद इनकी वजह से नॉन वेजीटेरियन के शरीर में घुसने वाले बैक्टीरिया का इलाज नामुमकिन हो जाता है। वहीं पोल्ट्री फार्म मालिकों का कहना है कि साल्मोनेला इंफेक्शन जो गंदगी की वजह से एक मुर्गे से दूसरे में बड़ी तेजी से फैलता है और मुर्गीखाने के सारे मुर्गों को चपेट में ले लेता है। इसलिए यह बीमारी दूर करने के लिए लेवोफ्लेक्सिन, टेट्रासाइक्लिन,नियोमाइसिन, अमीकासीन, एमोक्सीलिन, परफलोक्सीन के साथ प्रतिबंधित कोलिस्टिन दवा भी दी जा रही है।


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