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एम4पीन्यूज। 

आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से सजा पाने के बाद एआईएडीएमके की महासचिव वीके शशिकला को दूसरी बार झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने शशिकाल की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद शशिकला सरेंडर के लिए बेंगलूरू रवाना हो गईं। इससे पहले उन्होंने जयललिता को श्रद्धांजलि दी और ध्यान लगाया। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए मोहलत देने से मना कर दिया। बता दें कि शशिकला ने हेल्थ बैकग्राउंड पर सरेंडर करने के लिए दो हफ्ते का वक्त मांगा था।

 

 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद के लिए ओ पनीरसेल्वम और 62 वर्षीय शशिकला के बीच कटु टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। उच्चतम न्यायालय द्वारा शशिकला को आत्मसमर्पण के लिए और समय दिए जाने से इनकार करने के बाद वह कर्नाटक की राजधानी रवाना हुईं। शशिकला ने मरीन बीच पर जयललिता के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें धीरे धीरे कुछ कहते देखा गया लेकिन उनकी बात सुनी नहीं जा सकती थी।

 

एक बार फिर टूट की कगार पर AIADMK
– एआईएडीएमके की सीनियर लीडर्स का मानना है कि पार्टी एक बार फिर बुरे दौर से गुजर रही है। एक बार फिर से टूट हो सकती है।
– 1972 में एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) ने एआईएडीएमके का गठन किया था।
– 1987 में पहली बार पार्टी में दो धड़ों में बंट गई। 1989 में चुनाव में हार मिली।
– 1991 में जयललिता ने चुनाव में जीत हासिल कर खुद को राजनीति में स्थापित कर लिया।
– एमजीआर की बायोग्राफी लिखने वाले आर कन्नन के मुताबिक, ‘पन्नीरसेल्वम पार्टी कैडर को रिप्रेजेंट करते हैं। उनमें शशिकला को लेकर एक नाराजगी और भ्रम की स्थिति है। इसका एक कारण ये भी है कि शशिकला के पास सरकार चलाने का एक्सपीरियंस भी नहीं है।’
– ‘ये भी साफ नहीं है कि जयललिता की विरासत किसके हाथ में रहेगी। 1989 की तरह इसका असर वोटर पर पड़ सकता है।’

 
न्यायमूर्ति पी सी घोष के नेतृत्व वाली एक पीठ ने कहा, हम इस पर कोई आदेश नहीं देना चाहते। हम फैसले में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे। पीठ ने 19 साल पुराने इस मामले में शशिकला एवं दो अन्य को कल दोषी ठहराया था। इसके बाद इदप्पाडी के पलानीस्वामी को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुना गया।

 

 

शशिकला जयललिता का गत दिसंबर में निधन हो जाने के बाद से उनके पोएस गार्डन आवास में रह रही थीं। उनके वहां से रवाना होने से पहले समर्थकों ने नारेबाजी करके उनका अभिवादन किया। शशिकला समर्थकों की भीड़ के बीच से होते हुए जयललिता स्मारक पहुंची। उनके समर्थकों की भीड़ में पूर्व मंत्री गोकुला इंदिरा और उपमहासचिव टी टी वी दिनाकरन भी शामिल थे।


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