यहां कचरे से सजाईं जाती हैं विश्व धरोहरें


चंडीगढ़ प्रशासन एेसे कर रहा है देखभाल कैपीटॉल कॉम्पलैक्स की

एम4पीन्यूज | चंडीगढ़

यहां कचरे से सजाईं जाती हैं विश्व धरोहरें। जी हां, यूनेस्को ने चंडीगढ़ की इस बिलि्डंग को बफर जोन के साथ साथ विश्व धरोहर घोषित किया। प्रधानमंत्री ने यहां पर पहला योग दिवस भी मना लिया। यहां पर एक बार में 30 हजार लोग एकत्र हो सकते हैं। चंडीगढ़ को दुनियां के सामने रोशन करने वाले कैपीटॉल काम्पलैक्स को चंडीगढ़ प्रशासन बड़ी ही संजीदगी और सफाई से संभाल रहा है। कुछ एेसे कि इसकी शान में कोई कमी न रह जाए, कुछ एेसे की यहां आने वाले टूरिस्टों को किसी तरह की गलतफहमी न हो जाए कि यह स्वच्छ भारत का हिस्सा है। इस जगह को कचरे के ढ़ेरों से सजाया जा रहा है। हालत इतनी खराब है कि जहां कचरे के ढ़ेर लगे है वो जगह बफर जोन के अंदर अाती है।

स्मार्ट सिटी के दौड़ में चंडीगढ़ प्रशासन अाए दिन शहर में कईं तरह के अवेयरनेस प्रोग्राम करता है शायद मीडिया के जरीए अालाअधिकारियों की अांखों में चमकना चाहने की यह चाह उन्हें अंधा बना रही है कि विश्व धरोहर को स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुमार करना ही भूल गए। और यह सवाल यहां रहने वाले लोगों के लिए भी है कि माना यह जिम्मेदारी प्रशासन की है कि सफाई बरकरार रखी जाए लेकिन यहां रहने वाले बाशिंदों की इस शहर को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं है, क्या सिर्फ बाहर से अाए रिश्तेदारों के सामने चंडीगढ़ के निवासी होने का रूबाब ही अापके लिए काफी है। कमाल की बात यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन के किसी अधिकारी को यह कचरा दिखाई नहीं दिया।

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